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किसान की सफलता की कहानी

किसान ने पारंपरिक खेती छोड़ वैज्ञानिक विधि से धनिया की खेती कर कमाया मोटा मुनाफा

किसान ने पारंपरिक खेती छोड़ वैज्ञानिक विधि से धनिया की खेती कर कमाया मोटा मुनाफा

किसान रमेश विठ्ठलराव विगत दिनों अंगूर की खेती करते थे। परंतु, अंगूर की खेती में उन्हें घाटा उठाना पड़ा। इसके पश्चात उन्होंने धनिया की खेती करना चालू कर दिया। विशेष बात यह है, कि धनिया की खेती शुरू करने पर प्रथम वर्ष ही रमेश विठ्ठलराव को 25 लाख रुपये का मुनाफा अर्जित हुआ। लोगों का मानना है, कि सिर्फ गेहूं, मक्का, बाजार और धान जैसी पारंपरिक फसलों की खेती से ही बेहतरीन आमदनी की जा सकती है। परंतु, इस तरह की कोई बात नहीं है। अगर कृषक भाई आधुनिक विधि से हरी सब्जी एवं मसाले की खेती करते हैं, तो बहुत ही कम वक्त में वह धनवान बन सकते हैं। महाराष्ट्र के लातुर जनपद में एक किसान ने कुछ ऐसा ही कारनामा कर दिखाया है। वह धनिया की खेती से धनवान हो गया है। अब उनकी चर्चा संपूर्ण जनपद में हो रही है। लोग उनसे धनिया की खेती करने के गुर सीख रहे हैं।

रमेश ने पारंपरिक खेती छोड़ वैज्ञानिक विधि से धनिया की खेती की

जानकारी के अनुसार, किसान का नाम रमेश विठ्ठलराव है। पहले वह पारंपरिक फसलों की खेती किया करते थे। इससे उन्हें इतनी ज्यादा आमदनी नहीं हो रही थी। ऐसी स्थिति में उन्होंने 4 साल पहले पारंपरिक फसलों की खेती छोड़ वैज्ञानिक विधि से धनिया की खेती चालू कर दी। मुख्य बात यह है, कि धनिया की खेती चालू करते ही रमेश विठ्ठलराव की किस्मत चमक गई। उन्होंने धनिया बेचकर बेहद ही आलीशान घर बनवाया है, जिसकी सुन्दरता वास्तव में देखने लायक है।

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रमेश विठ्ठलराव विगत चार वर्षों से 5 एकड़ जमीन में धनिया की खेती कर रहे हैं।

रमेश विठ्ठलराव विगत चार वर्षों से 5 एकड़ जमीन में धनिया की खेती कर रहे हैं। उन्होंने बताया है, कि धनिया बेचकर अभी तक वे लाखों रुपये की आमदनी कर चुके हैं। रमेश विठ्ठलराव की मानें तो लातूर जनपद सूखा प्रभावित क्षेत्र है। यहां पर बहुत ही कम बारिश होती है। ऐसी स्थिति में पारंपरिक फसलों की खेती से किसानों को उतनी अच्छी आमदनी नहीं हो पाती है। बहुत बार तो कृषक भाई लागत तक भी नहीं निकाल पाते हैं। यही वजह है, कि मैंने धनिया की खेती करने का निर्णय लिया।

रमेश ने वर्ष 2019 में धनिया उत्पादन आरंभ किया था

विशेष बात यह है, कि किसान रमेश ने वर्ष 2019 में धनिया की खेती की शुरुआत की थी। पहले वर्ष ही उन्हें धनिया बेचकर 25 लाख रुपये की आय अर्जित हुई। बतादें, कि 5 एकड़ जमीन में धनिया बोने में उन्हें सिर्फ एक लाख रुपये की लागत लगानी पड़ी। इस प्रकार उन्होंने 24 लाख रुपये का शुद्ध मुनाफा अर्जित किया। इसी प्रकार उन्होंने साल 2020 में 16 लाख, साल 2021 में 14 लाख, 2022 में 13 लाख रुपये का धनिया बेचा। इस साल भी वे अभी तक धनिया बेचकर 16 लाख 30 हजार रुपए कमा चुके हैं। इस प्रकार रमेश ने धनिया बेचकर कुल 84 लाख रुपये से भी ज्यादा की कमाई करली है।
महिला किसान शिखा चौधरी ने अन्य महिलाओं व युवाओं के लिए भी रोजगार के अवसर प्रदान किए हैं

महिला किसान शिखा चौधरी ने अन्य महिलाओं व युवाओं के लिए भी रोजगार के अवसर प्रदान किए हैं

किसान शिखा चौधरी बाकी महिलाओं के लिए आदर्श हैं। वह अपने परिश्रम और समझदारी से आज काफी मुनाफा अर्जित करने के साथ युवाओं को रोजगार के अवसर भी प्रदान कर रही हैं। जैसा कि हम सब जानते हैं, कि महिलाएं प्रत्येक क्षेत्र में पुरुषों के साथ कदम से कदम मिलाकर चल रही हैं। अगर हम बात करें देश की राजनीति एवं या फिर कृषि क्षेत्र, आज हम आपको एक ऐसी ही महिला किसान की दास्ताँ बताएंगे जो अन्य महिलाओं के लिए एक मिसाल हैं। यह महिला किसान बेहद मुनाफा अर्जित कर रहीं हैं। आगे इस लेख में आपको बताऐंगे इस महिला किसान शिखा चौधरी के विषय में।

महिला किसान शिखा चौधरी कहाँ की रहने वाली हैं

आपकी जानकारी के लिए बतादें कि यह किसान महिला शिखा चौधरी हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जनपद की रहने वाली हैं। यह एक महिला किसान होने के साथ महिला कृषि-उद्यमी भी हैं। महिला किसान ने KVK की सहायता से खाद्य उत्पादों के विपणन की जानकारी हांसिल की और आज के समय में अच्छा मुनाफा हांसिल कर रहीं हैं। इसके अतिरिक्त ये एक महिला स्वयं सहायता समूह का भी प्रतिनिधित्व कर रही हैं। प्रारंभिक समय में इन पर बहुत सारी जिम्मेदारी थीं। साथ ही, मंदी आ जाने की वजह से जनपद में नौकरी के अवसर भी कम हो गए। इन सब बातों का ख्याल रखते हुए शिखा ने एक स्वयं सहायता समूह की शुरुआत की।

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शिखा चौधरी ने युवाओं को रोजगार के अवसर प्रदान किए

साल 2017-18 के मुकाबले में फिलहाल उनका समूह 1 लाख 38 हजार रुपये की अतिरिक्त आमदनी कमा रहा है। शिखा चौधरी ने बाकी बेरोजगार युवाओं को भी रोजगार प्रदान किया है।

शिखा चौधरी ने तैयार किए विभिन्न उत्पाद

शिखा के परिवार के पास 10 कनाल भूमि का टुकड़ा है। जहां पर वह गेहूं, धान और सब्जियों की खेती करती हैं। इसके साथ ही शिखा ओएस्टर मशरूम की खेती और विपणन में लगी हुई हैं। साल 2016 में केवीके की ओर से आयोजित व्यावसायिक प्रशिक्षण कार्यक्रम में वैज्ञानिक प्रसंस्करण के साथ खाद्य विपणन उत्पादों के बहुत सारे पहलुओं के विषय में जानकारी प्राप्त की। इसके पश्चात उन्होंने अपने समूह के कई सारे उत्पाद तैयार किए, जिनमें सीरा, सेपुबादी, दलिया, अचार, आम पाउडर, त्रिफला चूर्ण, सिवई इत्यादि शम्मिलित हैं।